
जगजननी के दर्शन अर्चन सेतन मन धन पावन करना है।।
जगजननी की संतान सभीक्या होगा न इसका ज्ञान कभी ,इंसान सभी भाई भाईइस धर्म को धारण करना है,जगजननी के दर्शन।।
धन धानये भरे हो ग्राम नगर,सुख के दिन रजनी जगर मगर,आनंदित करना है हर घर,गीतत हर आँगन करना है,जगजननी के दर्शन।।
जो जाहा रहे वो ...
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