
सब मिलके बजाओ ताली रे माँ काली ज्योत पे झूम रही
ज्योत भी फर फर फर फर करती
दिव्य रोशनी हुयी कुदरती
चेहरे पे आ गई काल रे माँ काली ज्योत पे झूम रही
ज्योत पे माँ का रूप निराला
खप्पर रुपी हाथ में प्याला
थाड़े चलके मसाणा तै आली रे माँ काली ज्योत पे झूम रही
रंग दरबार का निखरा जा सै
प्यार मात का बिखरा जा सै
सब जाणे माँ के सवाली रे माँ काली ज्योत पे झूम रही
कमल सिंह कर जोड़े बैठ्या
दुनिया तै मुँह मोड बैठ्या
बस माँ की लगन लगाती रे माँ काली ज्योत पे झूम रही
ओ माँ की सवारी शेर
दुनिया बदले माँ तू बदल ना जाईये
पितृ दाता तन्ने मनावन आई सु
हो मेरे पितृ खेवन हार
तेरी जय हो कुबेर
घर में मेरे लक्ष्मी पधारिये री माँ
जो माँ का सेवादार नहीं
वृषभानु दुलारी श्री राधे
शम्भू इक तू ही तू
सखी माँ का बुलावा आया है
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