
मां दिन दुखी निर्बल पर अपना स्नेह लुटाती हैं
महिमा है अपरंपार भक्त के कष्ट मिटाती हैं
सच्चे मन से आओ तो हर खुशियां मिल जाती हैं
देव ऋषि भी पूजा करते ऐसी हैं मेरी मईया
मां के भरोसे सब भक्तों की चलती है जीवन नईया
असुरों का वध करने के लिए चण्डी बन जाती हैं
मन की दुविधा दूर हो जाती मां की ज्योत जलाने से
किस्मत बन जाती है सबकी, महिमा इनकी गाने से
रोहित की लाज बचाने माता दौड़ी आती हैं
महिमा है अपरंपार भक्त के कष्ट मिटती हैं
दुर्गा आरती
दुर्गा चालीसा
देवी दुर्गा कवच
शेर पे सवार होके
माँ शेरावालिये
आ माँ आ
अटल छत्र सच्चा दरबार
चलो बुलावा आया है
मेरे नैनों की प्यास बुझा दे
बिगड़ी मेरी बना दे
सावन की रुत है
लाल लाल चुनरी
धरती गगन में होती है
कभी फुर्सत हो तो जगदम्बे
भोर भई दिन चढ़ गया मेरी अम्बे
बारिशों की छम छम में
नन्हे नन्हे पाँव मेरे
या देवी सर्वभूतेषु
मैं हूँ दासी तेरी दातीये
ऊँचे ऊँचे पर्वत पे
माँ पहाड़ान वालिये
मैया जी के रहते दुःख में क्या रोना
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