
Mera Mujhme Kuch Nahi Jo Kuch Hai So Tera
कबीर मेरा मुझ माहि किछु नही,
हो किछु है सो तेरा,
जो किछु है सो तेरा,
मेरा मुझ में कुछ नही।
तेरा तुझ को सोपते किया लागे मेरा,
कियां लागे मेरा किया लागे मेरा,
मेरा मुझ महि किछु नही…
मैं नाही प्रभु सभु किछु तेरा,
एखे निरगुन उथे सरगुन,
केल करत बिची सुआमी मेरा,
मेरा मुझ मेह किछ नहीं।
तू जीवन तू प्राण अधारा,
तुझ जी पेखि पेखि मनु सा धारा,
तू सजनु तू प्रीतम मेरा,
चितही न बिसरेह काहू बेरा,
हाऊ किछु नाही सब किछु तेरा,
ओति पोह्ती नानक संगी बसेरा,
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