
हो ओ ओ ..!
शेर पे सवार मेरी शेरावाली माँ
पहाड़ों में बसी मेरी मेहरावाली माँ
रूप हैं तेरे कई ज्योतावाली माँ
नाम है तेरे कई लाटावाली माँ
जग जननी है मेरी भोली भाली माँ
मेरे नैनों की प्यास बुझा दे
माँ तू मुझे दर्शन दे
अपने चरणों का दास बना ले
दयालु तू है माँ क्षमा कर देती है
सभी के कष्टों को माँ तू हर लेती है
जयकारा शेरावाली दा !
बोल साचे दरबार की जय !!
तू ही जग जननी है तू ही जग पालक है
चराचर की मईया तू ही संचालक है
तू ही संचालक है !
अपनी ज्योत में मुझको समा ले
दूर अब तुझसे माँ मैं ना रह पाउँगा
प्यास तेरे दर्शन की माँ अब ना सह पाउँगा
आसरा एक तेरा बाकि सब सपना है
तेरे बिन हे मईया कोई ना अपना है
कोई ना अपना है !
मेरे पैरों में पड़ गए छाले
अब तो मुझे दर्शन दे
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