
मानव तू है मुसाफिर भजन लिरिक्स|
मानव तू है मुसाफिर |
दुनिया है धर्मशाला
संसार क्या है सपना |
वो भी अजब निराला
ये रेन है बसेरा |
है किराये का ये डेरा
उसमे फसा है ये फेरा |
ये तेरा है ये मेरा
शीशे को मान बैठा |
तू मोतियों की माला
दुनिया तो है धर्मशाला
जन्मों का पुण्य संचित
नर देह तूने पाया
कंचन और कामिनी ने |
इसे व्यर्थ ही गवाया
कौड़ी के मोल तूने |
हीरे को बेच डाला
नश्वर है तन का ढांचा |
बालू की भीत काचा
ऋषियों ने परखा जांचा
बस राम नाम सांचा
झटके तू पी शिकारी |
सिया राम नाम प्याला
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