
अवध से आज मिथला में भजन लिरिक्स|
अवध से आज मिथला में लुटाने प्यार आये है |
सजे सेहरे में देखो सांवले सरकार आये है |
भर्मर से काली काली तिखरी घूंघर वाली अलको पर |
छटा छहराते मौर के छयल दिलदार आये है |
जमीन का ज़र्रा ज़र्रा है नहाया चाँदनी में आज |
कि मिथला काश पूनम चंदा चार आये है |
भले दाता जगत के है शिरोमणि दानियो में है |
ग्रहीता आज बन के ये जनक दरबार आये है
ऋचाये वेद की प्रताप जो सुन कर के अघाते है
वे सुनने रस भरी गारी यहां ससुरार आये है
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