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राम गुण गायो नहीं आय करके लिरिक्स
.।। दोहा ।।
चलती चक्की देख के, दिया कबीरा रोये ।
दो पाटन के बीच में, साबुत बचा न कोए ।
-:चेतवानी गीत:-
राम गुण गायो नहीं आय करके ,
जमसे कहोगे क्या जाय करके।
गर्भ में देखी नरक निसानी ,
तब तू कोल किया था प्राणी।
भजन करूँगा चित लाय करके।
बालपने में लाड लडायो ,
मात पिता तने पालणे झुलायो।
समय गमायो खेल खाय करके।
तरुण भयो तिरिया संग राच्यो ,
नट मर्कट ज्यो निशदिन नाच्यो।
माया में रह्यो रे भरमाय करके।
जीवन बीत बुढ़ापो आवे ,
इंद्री सब शीतल होय जावे।
तब रोवोगे पछताय करके।
वेद पुरान संत यो गावे ,
बार बार नर देही न पावे।
देवकी तिरोगे हरी गाय करके।
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