
सुनो तो गंगा ये क्या सुनाए
के मेरे तटपर वो लोग आए
जिन्होंने ऐसे नियम बनाए
के प्राण जाए पर वचन न जाए
गंगा हमारी
गंगा हमारी कहे बात ये रोते रोते
राम तेरी गंगा मैली हो गयी
पापियों के पाप धोते-धोते
हम उस देश के वासी हैं
जिस देश मे गंगा बेहति हो
ऋषियों के संग रहने वाली
पतितों के संग रहती
ना तो होठों पे सच्चाई, नही दिल मे सफ़ाई
करके गंगा को खराब, देते गंगा की दुहाई
करे क्या बिचारी
करे क्या बिचारी इसे अपने ही लोग डुबोते
वही है धरती, वही है गंगा
बदले है गंगा वाले
सबके हाथ लहू से रंगे हैं
मुख उजले मन काले
दिये वचन भुलाके, झूठी सौगंध खाके
अपनी आत्मा गिराके, चलें सर को उठाके
अब तो ये पापी
अब तो ये पापी गंगा जल से भी शुद्ध न होते
राम तेरी गंगा मैली हो गई
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