
Sarfaroshi Ki Tamanna
सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है,
देखना है जोर कितना बाजुए कातिल में है ।
करता नहीं क्यों दुसरा कुछ बातचीत,
देखता हूँ मैं जिसे वो चुप तेरी महफिल मैं है ।
रहबर राहे मौहब्बत रह न जाना राह में,
लज्जत-ऐ-सेहरा नवर्दी दूरिये मंजिल में है ।
यों खड़ा मौकतल में कातिल कह रहा है बार-बार,
क्या तमन्ना ए शहादत भी किसी के दिल में है ।
ऐ शहीदे मुल्को मिल्लत मैं तेरे ऊपर निसार,
अब तेरी हिम्मत का चर्चा ग़ैर की महफिल में है ।
वक्त आने दे बता देंगे तुझे ऐ आसमां,
हम अभी से क्या बतायें क्या हमारे दिल में है ।
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