
।। दोहा ।।
जय गणपति सदगुण सदन,
कविवर बदन कृपाल ।
विध्न हरण मंगल करण,
जय जय गिरिजालाल ।
।। चौपाई ।।
जय जय जय गणपति गणराजू,
मंगल भरण करण शुभ काजू ।
जय गजबदन सदन सुखदाता,
विश्व विनायक बुद्धि विधाता ।
वक्र तुण्ड शुची शुण्ड सुहावना,
तिलक त्रिपुण्ड भाल मन भावन ।
राजत मणि मुक्तन उर माला,
स्वर्ण मुकुट शिर नयन विशाला ।
पुस्तक पाणि कुठार त्रिशूलं,
मोदक भोज सुगन्धित फूलं ।
सुन्दर पीताम्बर तन साजित,
चरण पादुका मुनि मन राजित ।
धनि शिव सुवन षडानन भ्राता,
गौरी लालन विश्व विख्याता ।
ऋद्धि सिद्धि तव चंवर सुधारे,
मुषक वाहन सोहत द्वारे ।
कहौ जन्म शुभ कथा तुम्हारी,
अति शुची पावन मंगलकारी ।
एक समय गिरिराज कुमारी,
पुत्र हेतु तप कीन्हा भारी ।
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