
दिव्य तेज का मालिक साईं
सकल विश्व का पालक साईं
सूर्योदय सी छवि निराली
(सांचा आनंद देने वाली)
धर्मदीप धर्मात्मा साईं
परमपुरुष परमात्मा साईं
सत्य साईं से सद्गुण लीजो
(विनय भाव से वंदन कीजो)
दास भक्ति जिन्होंने है मांगी
भव से तर गए वो अपराधी
सर्वशक्तिमान है साईं
(योगी दयानिधान है साईं)
साईं है सबके संकट हरता
साईं ही घर घर मंगल करता
साईं का सुमिरन है वो धारा
(भय से देता जो छुटकारा)
साईं के द्वारे जो भी आते
सकल मनोरथ सिद्धि हो जाते
मंगलमूर्ति विघ्नविनाशक
(शरणागत बलहीन के रक्षक)
सी सुधा है मंगलदाई
साईं से प्रीति महा सुखदाई
साईं आश्रय देते सबको
(सी रूप में देखो रब को)
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