
सुख के सब साथी Sukh Ke Sab Saathi
(*सुख के सब साथी
दुःख में न कोई
मेरे राम, मेरे राम
तेरा नाम एक साचा
दूजा न कोई
जीवन आनी, जानी छाया
झूठी माया, झूठी काया
फिर काहे को सारी उमरिया
पाप की गठरी ढोई
ना कुछ तेरा, ना कुछ मेरा
ये जग जोगीवाला फेरा
राजा हो या रंक सभी का
अंत एकसा हाई
मगंल भवन अमंगल हारी
हम कथा सुनाते
अवध में राम आये हैं
राम कथा सब विधि सुखदाई
सम्पूर्ण सुन्दरकाण्ड पाठ
श्री राम चंद्र कृपालु
जय जय राम
दुनिया चले ना
कभी राम बनके कभी श्याम बनके
मरियादा पुरुषोत्तम राम
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