
उठो हे पवनपुत्र हनुमान Utho Hey Pawanputra Hanuman
उठो हे पवनपुत्र हनुमान
सागर पार जाना है
बनी श्री राम पे विपदा भारी
लंकपति हर लई जनकदुलारी
तुम विरो में वीर बलकारी
साबित कर दिखलाना है
तुम सा कौन भला बलशाली
है महावीर है धरा पर
भरो अगर हुंकार तो रख दो
तीनों लोक हिलाकर
लांघ जाओगे इस सिंधु को
एक छलांग लगाकर
किए जो बचपन में वो करतब
कर दिखलाना है
उठो हे पवन पुत्र हनुमान
वो नर दंड का भागी जो
नारी का करे अनादर
घोर अपराध किया रावण ने
कपट से किया हरण कर
गढ़ लंका में मात सिया को
रखा कहाँ छुपाकर
खोज खबर ले पूरी जल्दी
लौट के आना है
उठो उठो बजरंग उठो
रघुपति को धीर बंधाओ
हर्षित हो प्रभु राम काम कुछ
ऐसा कर दिखलाओ
बल बुद्धि के स्वामी तुम हो
काल से भी टकराओ
मर्यादा का ‘सरल’ तुम्ही ने
ध्वज फहराना है
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