
(*वक्रतुण्ड महाकाय
सूर्यकोटि समप्रभ
निर्विघ्नं कुरु मे देव
सर्वकार्येषु सर्वदा
लम्बोदर नमोस्तुभ्यम
सततम् मोदक प्रिय
वक्रतुण्ड – घुमे हुए सूंड
महाकाय – महा काया, विशाल शरीर
सूर्यकोटि – सूर्य के समान
समप्रभ – महान प्रतिभाशाली
निर्विघ्नं – बिना विघ्न
कुरु – पुरे करें
मे – मेरे
देव – प्रभु
सर्वकार्येषु – सारे कार्य
सर्वदा – हमेशा, सदैव
श्री सिद्धिविनायक मंत्र और आरती
मेरी विनती सुनो गणराज
गणेश चालीसा
शेंदुर लाल चढ़ाय
घर में पधारो गजानन जी
गणपति अथर्वशीर्ष
गणेश आरती
तेरी जय हो गणेश
सुख हरता दुःख हरता
गणेशा
हिंदी · Read on Bhajan Baan
Share this bhajan with your family
Send it to your satsang group before kirtan so everyone has the words.



