
अरे पेला जेडा प्रेम हमेशा कोनी रेवे ओ,
नेम धरम थारा छाना कोनी रेवे ओ,
अरे बरसीयोडा री बात बटाऊ बीरू केवे ओ,
अरे काचे धागे तानो तनियो,
तनीयो पेला टूटे ओ,
अरे ओचा जल री नाडीया,
आ बरसीया पेली फूटे ओ
अरे नीम जेडा खारा कडवा,
मीठा किन विद होवे ओ,
अरे दुदा धोवा कोयला,
उजला किन विद रेवे ओ,
अरे संत रे घर शंकनी,
थूल रे घर नार ओ,
अरे माया दिनी मगता ने,
भूल गयो किरतार रे,
अरे बोले रानी रूपा दे जी,
उगमजी री चेली ओ,
अरे करमा रे प्रताप सु,
अमरापुर मे खेली ओ,
प्रेषक – मनीष सीरवी
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