
अर्हम वन्दो जय पारस देवा,
अर्हम वन्दो (वन्दो),
वन्दो (वन्दो),
जय पारस देवा,
तर्ज – हर हर शम्भु।
श्रीमज जिनेन्द्र,स्याद्दवाद नायक,
तीर्थंकराय, दिगंबराय,
त्रिलोक्य व्याप्तम,त्रिकालदर्शी,
त्रिलोक्य लोचन,स्वयंभुवाय,
अर्हम,
हे वीतरागी,पञ्च परमेष्ठी,
मेरु प्रतिष्ठे,सम्यक प्रणम्य,
सौधर्म इन्द्र,कर जोड़ी हाथम,
तुभ्यम नमामी, हे पार्श्व नाथम,
रत्नस्य वृष्टि,करी षष्ठ मासे,
कुबेर हर्षित,तुभ्यं नमामी,
वाराणसी,अधि,पति हे देवम,
गर्भस्य वामा, मां उर,तिष्ठे,
अनन्तदर्शी,अनन्तवीर्या,
अनन्तचतुष्टय हो तुम जिनेश्वर,
पादौ पदानी,जिनेन्द्र धत्ते,
पद्मानी तत्रे,विबुधा रच्यांती,
चिंतामणि त्वं,ज्योतिस्वरूपी,
निराकार हे, निरंजनाय,
त्रिलोक्य मंगल,दिव्य ध्वनि त्वं,
मुख्स्य उचरे, हे पार्श्व नाथम,
त्वं कल्पवृक्षम, त्वं कामधेनु,
विषहर, विनाशम,उवसग्गहारम,
धरनेंद्र पद्मा, नागेंद्र पूजित,
जिनेन्द्र देवम, हे पार्श्व नाथम,
स्वर – दिव्या जैन, योगेश चतुर्वेदी।
लेखक – राजु जी बगड़ा।
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