
आई कालका माई
मेरी, आई कालका माई ॥
मां मेरी दा, रूप निराला ।
मात वैशनो, मात ज्वाला ॥
भुल्लियां नूँ, रस्ते पाईं,
मां, काली ने, मारे गेड़े ।
पार, लगा दे, सब दे बेड़े ॥
सब नूँ, तार दिखाईं,
हथ खंडा, त्रिशूल विराजे ।
गल मुंडां दी, माला साजे ॥
चामुंडा, कहलाईं,
चंड मुंड नूँ, मारन वाली ।
दुश्टां नूँ, संघारण वाली ॥
पाऊंदे, फिरन दुकाई,
रक्त बीज, पापी हंकारी ।
मारी जावे, वारोवारी ॥
चढ़ी, सिंघ ते आई,
खंडा मां दा, रुकदा नहीं सी ।
किसे दे अगे, झुकदा नहीं सी ॥
लहू दी, नहर वगाई,
मात कालका, खप्परधारी ।
महेशासुर नूँ, मारन वाली ॥
हा-हा, कार मचाई,
दर मैया दे, जो वी आए ।
खाली झोलियां, भर लै जाए ॥
सब नूँ, होवे सहाई,
भगत तेरे गुण, गावें मैया ।
चरणी सीस, झुकावै मैया ॥
दे, दर्शन महांमाई,
अपलोडर — अनिलरामूर्ती भोपाल
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