
आई बदरिया बरसन आई
बरसन आई सखी बरसन आई
आई बदरिया...
गरज़-गरज़ दामिनी दमकावे,
ज्यों चुनरीं में झलक किनारी
मधुर-मधुर कोयल बन बोले,
भवन-भवनगावत बृज़ नारी
आई बदरिया बरसन आई,बरसन आई
सखी बरसन आई
चलत पवन शितल नारायण,
परत फुहार लगत अती प्यारी
बाबा धसका पागल पानीपत
संपर्कंसुत्र-7206526000
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