
आज मेरे सतगुरु को घर लाऊँ,
दोहा – साधन भोजन प्रीत से,
और दीजे साधु बुलाय,
जीवत जस ही जगत में,
अंत परम् पद पाय।
जिस घर सेवा साधु की,
करे प्रीति और भाव,
जाका भाग सरावीए,
चढ़े सत की नाव।
चरण खोळ चरणामृत लेऊँ,
सिंघासन बिठाउँ,
चंदन से चौका निपाउँ,
मोतिया चोक पुराऊं,
निरियल पान सुपारी केला,
फल अनेक चढ़ाऊँ,
शब्द मिटाय विविध बातन की,
थाल माही भराउं,
अमृत जल झारी ले प्रेम से,
सतगुरु को जिमाउँ,
कंचन थाल कपूर की बाती,
आरती साज सजाऊँ,
तन मन धन निसरावल करके,
आरती मंगल गाउँ,
धर्मीदास विनय कर जोड़ी,
भक्ति दान पद पाऊँ,
सायब कबीर सा मिलिया गुरु समर्थ,
सुख सागर में नहाऊं,
गायक – मोहन राम अणकिया।
प्रेषक – रामेश्वर लाल पँवार।
आकाशवाणी सिंगर।
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