
आज सोना रो सूरज उगीयो माजीसा,
ओ दिनडो कद उगसी रे मैया मारे,
उगसी रे मारी,
माजीसा घर आवे आंगन माय,
माजीसा मारी घर आवे भटीयल माँ,
बार बार करू विनती ओ,
माजीसा मारी विनती ओ,
माजीसा मारे घर आवो भटीयाणी मात,
एक अरज मारी साम्भलो ओ रे,
माजीसा मारी,
साम्भलो ओ रे माजीसा मारी,
सेवक बुलावे मारी माँ,
भटीयाणी सा मारी,
एक बार दर्शन माने देवजो ओ ए,
माजीसा मारी देवजो ओ रे,
भटीयाणी सा रे लुल लुल लागू पाव,
माजीसा थारे लुल लुल लागू पाव।।
आज सोना रो सूरज उगीयो ओ रे,
माजीसा मारे उगीयो रे,
माजीसा मारे आंगन पधारीया आप,
चौक पुरावु मारे आंगने रे,
माजीसा मारे आंगने रे,
भटीयाणी सा रे पाट पुरावु मारी माँ,
माजीसा पाट पुरावु मारी माँ।।
कुनजी उतारे माजीसा री आरती ओ,
बीरा मारा आरती ओ माजीसा रे,
कुन लागे लुल लुल पाव,
पुजारी उतारे माँ री आरती ओ,
बीरा मारा आरती ओ बीरा मारा,
भगत लागे लुल लुल पाव माजीसा रे,
भगत लागे लुल लुल पाव।।
तेरस रो दिन आपरो रे माजीसा मारी,
आपरो ओ माजीसा मारी,
मेलो रे जसोल गढ माय,
भटीयाणी सा रो,
दूरा दूरा आवे यात्री ए माजीसा थारे,
यात्री ओ माजीसा थारी,
बोले जय जयकार,
भटीयाणी सा री बोले जय जयकार।।
‘श्याम पालीवाल’ करे विनती ओ,
माजीसा थाने विनती ओ,
भटीयाणी सा रे चरना माय सुख पाय,
माजीसा थारे चरना मे सुख पाय,
दास बालक कहिजु आपरो ओ,
माजीसा मारी आपरो ओ,
आवु थारोडे दरबार,
माजीसा मेतो नित उठ आवु दरबार।।
गायक – श्याम पालीवाल जी।
प्रेषक – मनीष सीरवी
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