
आज हमारे घर है कीर्तन बांके बिहारी जी आएंगे
आज हमारे घर है कीर्तन,
बांके बिहारी जी आएंगे,
बांके बिहारी जी आएंगे संग,
राधा रानी जी को लाएंगे,
तर्ज – सांवरी सूरत पे मोहन।
फूलों से आँगन को सजाया,
और सजाया कलियों से,
आएंगे सरकार हमारे,
कुञ्ज गली की गलियों से,
प्यारे ठाकुर ठकुरानी को,
संग में लेकर आएंगे,
कितने दिनों से हम दर्शन की,
आस लगाकर बैठे थे,
पड़ेंगे चौखट श्री चरण,
विश्वास जगा कर रहते थे,
आँखें थी दीदार को तरसी,
हाल ए दिल बतलायेंगे,
मैं ‘गगन’ हरि नाम दीवाना,
गाऊं हरी जी के नाम को,
संकीर्तन ही जीवन मेरा,
नमन मेरा ब्रजधाम को,
जैसी किरपा मुझपे बरसी,
तुम सब पर बरसायेंगे,
देखे – आना जी मेरे घर आना।
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