
आदत पड़गी बाबा,
थांस्यू लाड लड़ावण की,
म्हारा खाटुवाला श्याम,
थांस्यू बतलावण की,
आदत पडगी बाबा,
तर्ज – ना स्वर है ना सरगम।
तुम हाथ पकड़ते हो,
रस्ता दिखलाते हो,
एक बाप के होने का,
तुम फर्ज निभाते हो,
म्हारी ली जिम्मेदारी,
रस्ता दिखलावण की,
मन की सारी बातां,
थांस्यू बतलावां हां,
माँ की ममता सारी,
सांवरा थांस्यू पावां हां,
थांस्यू नैण मिलाकर के,
आंसू छलकावण की,
थांस्यू मिलबा खातिर,
म्हार चाव घणों जागे,
खाटु नगरी म्हाने,
पिहरीयो सो लागे,
म्हारे मन में चाव रवे,
पिहरीये जावण की,
बाबुल घर म्हें जावां,
तन मन की बतलावां,
झुरझुर हिवड़ो रोवे,
जद मिल पाछां आवां,
थारे ‘देवकीनन्दन’ ने,
भजनांस्यू रिझावण की,
– गायक एवं प्रेषक –
देवकीनन्दन जी पेड़िवाल
(नेपाल)
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