
आदत है खाटू वाले की,
दोहा – ओ मतवारे बावरे,
क्यों है तू बेचैन,
आकर दर श्री श्याम के,
मिला नैन से नैन।
ये जग तपती रेत है,
श्याम सलोना छाँव,
छोड़ के रहना धुप में,
बस खाटू के गाँव।
हारे हुए को जिताने की,
मिलती दवा है श्याम के दर पे,
हंसने और हंसाने की,
देखे – बाबा हमें तेरी आदत हो गई है।
जितने भी है इस दुनिया में,
श्याम प्रभु के दीवाने,
कितने भी हालात हो मुश्किल,
हार मानना ना जाने,
आ खाटू के द्वार चला आ,
देख श्याम के नैनन में,
खुशियां ही खुशियां बरसेगी,
तेरे पुरे जीवन में,
यहाँ नहीं है देर जरा भी,
और यहाँ अंधेर नहीं,
संकट और मुसीबत गम की,
श्याम के दर पर खैर नहीं,
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