
दूर उस, आकाश की, गहराइयों में,,,
इक नदी से, बह रहे हैं, आदि योगी
शून्य सन्नाटे, टपकते जा रहे हैं,,,
मौन से, सब कह रहे हैं, आदि योगी
योग के इस, स्पर्श से अब,
योगमय, करना है तन मन,,,
सांस शाश्वत, सनन सननन,
प्राण गुंजन, धनन धननन
उतरें मुझ में, आदि योगी
योग धारा, छलक छन्न छन्न
पीस दो, अस्तित्व मेरा,
और कर दो, चूरा चूरा
पूर्ण होने, दो मुझे और,
होने दो अब, पूरा पूरा
भस्म वाली, रस्म कर दो, आदि योगी
योग उत्सव, रंग भर दो, आदि योगी
बज उठे ये, मन सितारी,
झनन, झननन, झनन, झननन
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