
आनंद ही आनंद छाया
महाँराज, गजानंद आया ॥
आनंद ही, आनंद...
शीश, मुकुट धरे, माथे तिलक सजे ॥
तन, पे पीतांबर सजाया,
गले, वैजयंती माला, माता गौरां के लाला ॥
मोदक, का भोग लगाया,
तेरी, ज्योति जलाऊँ, तुझे भेंट चढ़ाऊँ ॥
भक्तों, ने मंगल गाया,
तेरे, दर पे मैं आऊँ, आ के शीश झुकाऊँ ॥
बप्पा, अमृत, रस बरसाया,
तेरा आसन लगाया, देवा फूलों से सजाया ॥
भक्तों ने, दर्शन पाया,
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