
आया फागण मेला,
ओय क्या बात हो गई,
खाटू नगरी में रंगों की,
बरसात हो गई,
मौसम रंग रंगीला,
तर्ज – छुप गए सारे नज़ारे।
भक्तों की टोली,
चली खेलने होली,
लेकर भर रंगो की झोली,
घर से निकले हैं,
मन में यही लेके उमंग,
अबके खेलेंगे होली,
खाटू वाले के संग,
छोड़ के सारा झमेला,
श्याम के द्वारे,
गूंजे जयकारे,
दिलकश लगे सारे नज़ारे,
फागण मेले की भक्तों,
है अलग पहचान,
देखो हाथों में सबके,
बाबा श्याम का निशान,
चले भक्तों का रेला,
धूम मची है,
खाटू नगरी सजी है,
प्रेमियों पे खुमारी चढ़ी है,
सांवरे ने लगाया,
ऐसा अपना ये रंग,
कोई पागल दीवाना,
कोई बनके मलंग,
नाचे ‘कुंदन अकेला’,
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