
आरती दीनदयाल,
साहेब आरती हो,
आरती गरीब नवाज,
ज्ञान आधार विवेक की बाती,
सुरति जोत जहाँ जात,
आरती दीन दयाल,
आरती करूँ सतगुरु साहेब की,
जहां सब सन्त समाज,
दर्श परश मन अति आनंद भयो हैं,
छूट गयो यम को जाल,
साहेब कबीर सन्तन की कृपा से,
भयो हैं परम प्रकाश,
अनहद बाजा बाजिया,
ज्योति भई प्रकाश,
जन कबीर अंदर खड़े,
सामी सन्मुख दास।
गाजा बाजी रहित का,
भरम धर्मी दूर,
सतगुरु खसम कबीर हैं,
मोहे नजर न आवे और।
झलके ज्योति झिलमिला,
बिन बाती बिन तेल,
चहुँ दिश सूरज उगिया,
ऐसा अदभुत खेल।
जागृत रूपी रहित हैं,
चकमक रही गंभीर,
अजर नाम विनशे नहीं,
गुरु सोहम सत्य कबीर।।
प्रेषक – रामेश्वर लाल पँवार।
आकाशवाणी सिंगर।
हिंदी · Read on Bhajan Baan
Share this bhajan with your family
Send it to your satsang group before kirtan so everyone has the words.



