
इण सरवरिये पाणी,
कदे ही न जाऊँ,
म्हारे नंद जी रो लालो,
लारे लाग्यो हे माँ,
सांवरा सरवरियें पाणी,
सिर पर घड़ो घड़े पर बेड़ो,
म्हारी इडाणी मोतिया वाली हे माँ,
हाथ पग धोवती ने कपड़ो निचोवती,
म्हारी ओढ़नी रे छांटा लाग्या हे माँ,
नंद जी लाल जी बछड़ा चरावता,
म्हाने घड़ो ऊंचावता जावो हे माँ,
घड़ो ऊंचावता पूणचो पकड़यो,
म्हारी तोड़ी तोडी़ बाजूबंद री लूम्बर हे माँ,
नंद जी रा लाल जी कलेवो करता,
वे तो माखन मिश्री खावे हे माँ,
एक कवो लियो कानो दूजो कवो लियो,
ऐ तो तीजोड़ा में राधा संग खेले हे माँ,
शरद पूनम री रात चांदनी,
ऐ तो गोपियों सु रास रचावे हे माँ,
स्वर – संत श्री रामप्रसाद जी महाराज।
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