
ऐ नर ज़रा बता दे,
कौतुक ये क्या किया है,
तूने जगत में आकर,
सतगुरु भुला दिया है।।
तर्ज – मुझे इश्क़ है तुझी से।
तू गर्भ के नरक में,
जब कष्ट सह रहा था,
बाहर मुझे निकालो,
रो रो के कह रहा था,
पर तूने जन्म लेकर,
वादा भुला दिया है,
अनमोल हीरा जन्म,
यूँ ही गवा दिया है,
तेरी ये ज़िंदगानी,
एक बुलबुला है पानी,
फिर भी नही तू समझा,
नादान ओ प्राणी,
तू किस लिए था आया,
ये भी न समझ पाया,
अपना निशान अपने,
हाथों मिटा दिया है,
– भजन लेखन एवं प्रेषक –
अमन शर्मा
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