
ऐ श्याम कृपा बरसा दो,
तेरे लायक मुझे बना दो,
मेरा मन उपवन है सुना,
प्रभु प्रेम के फूल खिला दो,
ना जाने इस जीवन में,
कितने अपराध हुए है,
कितने ही जनम अभी तक,
यूँ ही बर्बाद हुए है,
भटके हुए इस राही को,
कोई सच्ची राह दिखा दो,
इन पैरो से चल कर के,
तेरे सत्संग में नहीं आया,
दुनिया के रंग सुहाए,
एक तेरा रंग ना भाया,
तेरा जनम जनम गुण गाउँ,
अब ऐसा रंग चढ़ा दो,
कितने निर्मल मन वाले,
तूने मुझ से मिलवाये,
मैं मूरख समझ ना पाया,
अपने है कौन पराए,
जिनसे अपनापन तेरा,
उन अपनों से मिलवा दो,
प्रभु मस्त हुए है कितने,
भक्ति का पीकर प्याला,
यदि एक बूँद तू दे दे,
हो जाऊ मैं मतवाला,
‘बिन्नू’ तुझमें रम जाए,
अब ऐसा स्वाद चखा दो,
स्वर – रजनी जी राजस्थानी।
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