
ओ पिलो पिलो सो तू सीम दे निशान जानो मन्ने खाटू नगरी खाटू नगरी रे भाया श्याम नगरी
( तर्ज - नीली साटण को सीमा दे ... )
ओ पिलो - पिलो सो तू सीम दे निशान
जानो मन्ने खाटू नगरी - खाटू नगरी रे भाया श्याम नगरी
खाटू जाकर सबसे पहला तोरण द्वार निहारु
तेरा पीढ़ी चढ़कर मैं बाबा की नजर उतारु
मारी श्याम पुरानी प्रीत बड़ी उकी दूर नगरी
मंदिर आकर थाने बाबा रोज मैं भजन सुनाउ
नाचूं मैं भगत के संग में रोज थाने मनाऊं
होरी मंदिर में इत्र की भरमार बड़ी थारी प्यारी नगरी
फागुन के महीने में बाबा भीड़ या भारी आवे है
कोई लगावे धोक बाबा कई मांगने आवे है
हो री लकी पर कृपा थारी बड़ी तेरी सुंदर नगरी
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