
ओह दिसदा दरबार मैया दा ओह दिसदा
सावन दी है रुत निराली भगता दे मन भावन वाली
छेती छेती चढ़ जा चडीया देख द्वारा ओह दिसदा
उचे परबत तेरा डेरा पार लगा दे मेरा बेडा
मुहो माँ दा बोल जयकारा देख द्वारा ओह दिसदा
दुरो चल के संगता आइया भेटा तेरियां नाल लाईया
मन विच माँ दी ज्योत जगा लै देख द्वारा ओह दिसदा
तीन लोक तेरी पूजा करदे रात दिने तेरी आरती करदे
तू वी बेशक बोल जयकारा देख द्वारा ओह दिसदा
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