
कईया होसी हार म्हाने श्याम धणी रो साथ है
कईया होसी हार,
म्हाने श्याम धणी रो साथ है,
म्हारो साथी दीनानाथ है।।
तर्ज – कीर्तन की है रात।
सुख दुःख में साँवरियो,
सदा साथ रेवे म्हारे,
छोड़ो ना एकलो,
जद भी पुकारा हाँ,
झट दोड़यो आवे है,
चावे है मोकलो,
इणसु ऐसो प्यार,
म्हारी राखे हर यो बात है,
म्हारी विपदा दूर करे,
म्हारी चिंता दूर करे,
करुणानिधि नाम है,
हारे को साथी बन,
गिरते ने उठाने को,
इनको यो काम है,
संग है खेवणहार,
म्हाने डरने की के बात है,
म्हे श्याम भरोसे हाँ,
म्हे श्याम के लारे हाँ,
म्हे श्याम से आस करां,
पलका के झूले पे,
म्हारो बाबो झूले है,
इनको ही ध्यान धरां,
‘गुट्टू’ की डोरी,
अब साँवरिये के हाथ है,
स्वर – केमिता जी राठौर।
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