
कन्हैया आछी बजई जे तू तो बांसुरी
कन्हैया आछी बजई जे,
तू तो बांसुरी,
गोपाला आछी बजई जे,
म्हारे हिवड़े में,
उठे रे हिलोर सांवरा,
आछी बजई जे तू तो बांसुरी,
कानुड़ा आछी बजई जे,
तर्ज – मोरिया आछो बोल्यो री।
कानुड़ा मैं तो दीवानी,
थारे नाम की,
तू तो मीठी रे मीठी,
मुरली सुनाए सांवरा,
कन्हैया राधा तो,
सूती रंग रा महल में,
गोपाला राधा तो,
ज्यारी अखिया री,
नींदडली उड़ाय सांवरा,
कानुड़ा थारी तो मुरली,
मन मोह लियो,
सुनकर नाचे म्हारे,
हिवड़े रो मोर सांवरा,
कन्हैया नदी के किनारे,
थारो गाँव रे,
गोपाला नदी के किनारे,
वठे ठंडी ठंडी,
आवे रे हिलोर सांवरा,
कन्हैया गोकुल में बाजे,
थारी बासुरी,
गोपाला गोकुल में बाजे,
वठे तो नाच रिया,
नर और नार सांवरा,
कानुड़ा जादूभरी है,
प्यारी लागे थारी,
बंशी नंदकिशोर सांवरा,
कन्हैया राधा तो सुन सुन,
हो गयी बावरी,
गोपाला राधा तो सुन सुन,
वा तो छोड़ दिया है,
घर और बार सांवरा,
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