
कर दिल साफ पाप मत राखो,
दोहा – पापी कदेनी सुधरे,
सौ साधो के संग,
अरे मूंज बिजोई गंग में,
वहा रही तंग री तंग।
दोष न लागे तीखा रे संतो,
केवु शब्द भगती का ए हा,
अरे कर दिल साफ पाप मत राखों,
अरे सत्त रा वचन सुनो सतवादीयो,
सत्त रा वचन सुनो सतवादीयो,
केवे विरद भगती का ए हा,
अरे सत्त री नाव नजर पर रखना,
सत्त री नाव नजर पर रखना,
नैन जडे मुक्ति रा रे संतो,
खमीया अंग राखो आतम मे,
नीरज लक्ष्मण धरती का ए हा,
दिल दरीयाव सायर वाली लक्ष्मी,
रेना चील वतीका रे संतो,
सतवंती नार पति धर्म पाले,
पाले वचन पति का ए हा,
पति री फूट कदेनी हेरे,
यह है काम सती का रे संतो,
अरे तीन दोष थारा तन का बोले,
तीन दोष है मन का ए हा,
चार दोष वचन का बोले,
ओर दोष काईका रे संतो,
रामानंद गुरू पूरा मिलीया,
दिया शब्द टक सारा ए हा,
कहत कबीर सुनो भई संतो,
अमर लोक हराना रे संतो,
गायक – प्रकाश माली जी।
प्रेषक – मनीष सीरवी
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