
अरे, करुणा निधान रउँवा,
जगत के दाता हई,
करूँणा निधान रउँवा,
श्री भगवान रउवा,
मती के फेर देनी,
विपत के टेर देनी
के बा समान रउँवा,
ग्राह के मार दिहनि,
गज के उबार लिहनी,
जाने जहान जगत के दाता हई,
भक्त विदुर घर गयीनी,
प्रेम से सगवे खयीनी,
छोड़ के पकवान रउवा,
केवट से चरण धोवावनी,
गीधपति हीए लगवनी,
जाने जहाँन रउवा,
मैयां शबरी घर गईनी,
झूठे बेरन के खईनी,
करके बखान रउवा,
करुणा निधान रउवा,
गावेले ले दास गायत्री,
खीच के तीन गो चिक्री,
कईनी बुद्धिमान रउवा,
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