
कलयुग में देव निराले बाबा ये खाटू वाले
कलयुग में देव निराले,
बाबा ये खाटू वाले,
महिमा है इनकी अपरम्पार,
पूजे है सारा संसार,
प्रेमी ने जब भी पुकारा,
लीले चढ़ काम संवारा,
कहलाये जग में लखदातार,
तर्ज – कजरा मोहब्बत वाला।
ऐसा ये देव दयालु,
जग में है चर्चा भारी,
अपने ही बने पराये,
साँची है इसकी यारी,
ढूंढ लो चाहे ज़माना,
ऐसा ना लखदातारी,
पांडव कुल के अवतारी,
शोभा है इनकी न्यारी,
सेठों में मोठे साहूकार,
सुनवाई होती पल में,
जो भी आता है हार के,
मिल जाती खुशियां सारी,
मौसम पाता बहार के,
कट जाए विपदा सारी,
जो भी जाता निहार के,
सूरत है भोली भाली,
अँखियाँ है कारी कारी,
कहलाता है ये पालनहार,
माथे पर हीरा चमके,
बागा केसरिया पहने,
लीले का है असवारी,
सांवरिया के क्या कहने,
खुश होता हँसता देख के,
प्रेमी है इसके गहने,
‘गौरव’ की झोली खाली,
झोली वो किस्मत वाली,
भरते खुद श्याम धणी सरकार,
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