
सुन भक्तों की पुकार होके नंदी पे सवार ।
काशी नगरी से आये हैं भोले शंकर ।।
भस्मी रमाये देखो डमरू बजाये,
कैसा निराला भोले रूप सजाये ।
गले में है सर्पो का हार होके नंदी पे सवार,
मृग चाल पहने है जटाओ में गंगा,
चम चम चमकता है माथे पे चंदा ।
गौरी मैया के श्रृंगार होके नंदी में सवार,
देवों के देव इनकी महिमा महान है,
भोले भक्तों के ये तो भोले भगवान है ।
करने भक्तों का उद्धार होके नंदी पे सवार,
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