
कहाँ के पथिक कहाँ कीन्ह है गवनवा
कौन ग्राम के धाम के वासी,
के कारण तुम त्यजो है भवनवा
उत्तर देश एक नगर अयोध्या,
राजा दशरथ नृप वहाँ है भुवनवा
उन ही के हम दोनों कुंवरवा,
मात वचन सुनि तज्यो है भवनवा
राम वधु पूछें सिया से कौन से प्रीतम, कौन देवरवा
सिया मुसकाई बोलत मृदु वानी, सांवरो प्रीतम गोरे देवरवा
तुलसी दास प्रभु आस चरण की,
मेरो मन हर लीन्हो जानकी रमणवा
(शान दुबे)
/छिंदवाड़ा
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