
काई लाया न काई लई जावंगा,
जसा आया न वसा चली जावंगा।
दी रे विधाता न सुंदर काया,
करी लेओ भजन भाई छोड़ी न माया,
भजन करी न अपण तरी जावंगा,
साथ नही जाय थारी महेल अटारी,
थारी म्हारी म उमर बीती गई सारी,
इनका चक्कर म अपण रई जावंगा,
लगी गो बूढ़ापो तब पकड़ी लियो खाट,
लाई दे कोई पाणी भाई देखी रयो वाट,
पाणी माँगी माँगी मरी जावंगा,
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