
कितना रोई पार्वती,
शिवनाथ के लिए,
मैं तो प्राण भी तज दूंगी,
भोलेनाथ के लिए,
सबने कितना समझाया,
पर ना मानी महामाया।।
तर्ज – जितना राधा रोई कान्हा।
जबसे हाँ जनम लिया था,
शिव को था अपना माना,
शिव का ही वरण करूँगी,
मन में था ये ही ठाना,
मैं कुछ भी कर दूंगी,
शिव के साथ के लिए,
वो औघड़ है वो योगी,
हिमाचल ने समझाया,
बड़ा तू दुख सहेगी,
मैना माँ ने बतलाया,
एक ना मानी फिर भी,
शिव के हाथ के लिए,
सप्त ऋषियो ने आकर,
भी गौरा को समझाया,
पिए वो भंग धतूरा,
नाग को गले बिठाया,
और भी जागी श्रद्धा,
कृपा नाथ के लिए,
स्वर – राकेश काला।
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