
कितना सुंदर हिरण मनोहर चरने आया है
कितना सुंदर हिरण मनोहर,
चरने आया है,
स्वर्ण वर्ण हैं अंगन सुंदर,
बड़े-बड़े नैन है काले काले,
दीनबंधु भगवान हिरण मेरे,
मन को भाया है,
सिया के वचन राम ने जाने,
राम ने जाने हा राम ने जाने,
लिया धनुष अवतार उन्होंने,
तीर चलाया है,
लक्ष्मण कहकर मृग ने पुकारा,
मृग ने पुकारा हाँ मृग ने पुकारा,
सुन लक्ष्मण का नाम,
मैया का दिल घबराया है,
कहत जानकी सुनो मेरे भैया,
सुनो मेरे भैया हाँ सुनो मेरे भैया,
तुम्हरे भ्रात पर विपति पड़ी,
अब देव सहारा है,
बोले लक्ष्मण सुनो मेरी माता,
सुनो मेरी माता हाँ सुनो मेरी माता,
उनको कौन हराये,
जिन्होंने काल हराया है,
प्रेषक – वीरेंद्र सिंह कुशवाहा
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