
कियाँ भुलगी विधाता लिखना,
लिखना लिखना लिखना,
सोना म तू सुगन्ध भूल गयी,
किस्तूरी म रंगना,
बड़ पीपल क फूल भूल गयी,
नागर बेल क फल ना,
चातरक नार पुत्र बिना तरसे,
फूड़ ख़िलाव ललना,
सूरा क मैया ख़िरज्यो भूल गयी,
दातारा क धन ना,
हाथ्या क तू धीणो भूल गयी,
जंगल कर दिया बसना,
चंद्र सखी भज बाल कृष्ण छवि,
हरि चरनन चित घरना,
आ म्हारो देदयो जी चिर मुरारी,
देदयो जी चिर मुरारी,
लेकर चिर कदम्ब पर चढ़ गया,
हम जल बीच उघारी,
म्हाको देदयो जी चिर मुरारी।।
थाको चिर राधे थायी न देस्या,
हो जाओ जल से न्यारी,
जल से बाहर किस बिध होवा,
आप पुरुष हम नारी,
म्हारो देदयो जी चिर मुरारी,
तुम जीते हम हारी,
जल कैसे भरु ए मेरी बहना,
श्याम बजावत हैं रस बेना,
लेकर गागर सागर पर चली,
मिल गये श्याम सलोना,
यमुना की इरा तीरा धेनु चराव,
वाइस लगी म्हारी नैना,
ईलड़ी दुलड़ी ओर पचलड़ी,
बाजूबंद नगीना,
कूच की डोर जब बिगसन लागी,
छुटे अंग पसीना,
आज बजी कुछ काल बजी थी,
बाज रही आदि रैना,
सुर श्याम गोपियन के आगे,
बाजे करकर चैना,
गायक – श्री अमरचन्द सोनी।
प्रेषक – विशाल सोनी
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