
कैकई तूने लुट लिया,
दशरथ के खजाने को,
तू तरस जाएगी रानी,
मांग अपनी सजाने को,
तर्ज – मुझे पिने का शौक।
(दशरथ जी कैकई से)
भाल तरसेगा बिंदिया को,
आँख तरसेगी कजरे को,
हाथ तरसेंगे कंगन को,
बाल तरसेंगे गजरे को,
सबसे मिलने मिलाने को,
मार पाई ना तू मन को,
तूने जाना है धन जन को,
रघुकुल के जीवन को,
राम भेजे है वन को,
तूने रस्ता चुना रानी,
सीधे नरक में जाने को,
राम प्राणों से प्यारे मेरे,
नैनो के है तारे मेरे,
तूने वर माँगा था मुझसे,
ये उम्मीद ना थी तुझसे,
रानी वन में ना तुम भेजो,
रघुकुल के घराने को,
स्वर – हेमलता जी शास्त्री।
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