
कोहिनूर का जलवा है,
जन्नत का नजारा है,
कश्मीर की वादी में,
शेरोवाली का द्वारा है।।
तर्ज – एक प्यार का नगमा है।
दोहा – ना इसका है ना उसका है,
ना मेरा है ना तेरा है,
कश्मीर की प्यारी वादी में,
शेरोवाली का डेरा है।।
हर ओर पहाड़ों ने,
डाला हुआ घेरा है,
हर जगह बहारों ने,
फुलों को बिखेरा है,
भगवान ने धरती पर,
एक स्वर्ग उतारा है,
मेरी माँ का द्वारा है,
है केन्द्र तपस्या का,
ऋषियों की वो धरती है,
इस धरती की कुदरत भी,
आराधना करती है,
कोई पुण्य का सागर है,
मुक्ति का द्वारा है,
माँ के उस द्वारे की,
महिमा ही निराली है,
खाली ना कभी आए,
जाता जो सवाली है,
ममता के सरोवर की,
अनमोल वो धारा है,
स्वर – लखबीर सिंह लख्खा जी।
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