
कौन कहते है गणराज आते नहीं,
हे गजाजन गणेशा गौरी सुतम,
एकदंतम सदा मंगलम कारकम।।
तर्ज – अच्चुतम केशवम।
हम तो प्रेम से उनको बुलाते नहीं,
कौन कहते है गणराज नाचते नहीं,
गणेश भक्तों के जैसे नचाते नहीं,
कौन कहते है गणराज खाते नहीं,
भाव से उनको मोदक खिलाते नहीं,
देखो ‘आशु’ बना बावला प्यार में,
बैठा गणपत के चरणों में सत्कार में,
भावना ऐसी तुम क्यों दिखाते नहीं,
तुम तो प्रेम से उनको बुलाते नहीं।।
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