
क्या कहना शृंगार का
गज़ब सरकार का वो लख दातार का,
क्या कहना शृंगार का श्याम सरकार का,
मोर मुकट सिर सोहे नैना कजरारे,
देखे जो सांवरे को वही दिल हारे,
फूलो की बनिहार का इतर की गुहार का,
लटके है कैसी देखो लट गुंगरली,
छवि मेरे सांवरे की जग से निराली,
ये कजरे की धार का झलकते प्यार का,
कानो में कुण्डल कैसे चम् चम् चमके,
रूप सलोना प्यारा दम दम दमके,
मेरे दिल दार का नीले के अस वार का,
भीम सैन जाए कान्हा तुझपे बलिहारी,
दिल में वसी है तेरी छवि प्यारी प्यारी,
ये बाबा घोटेदार का हीरो से बेशुमार का,
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