
क्यों घबराये मन मेरा जब मुझको ये अहसास है
क्यों घबराये मन मेरा जब,
मुझको ये अहसास है,
मेरा माझी मेरा खिवैया,
रहता मेरे पास है,
क्यों घबराए मन मेरा जब,
देखे – क्यों घबराऊँ मैं।
जब मैं सोऊँ तब ये सोए,
जब जागूँ जग जाता है,
मेरे सिरहाने बैठा बाबा,
सर पे हाथ फिराता है,
मुझसे बोले बोलो बेटा,
तुझको क्या दरकार है,
मैं बोलूं ना ना रे बाबा,
तू मेरी सरकार है,
श्री कृष्ण वर व्यापी ये,
कलयुग का अवतार है,
पापी से भी पापी को भी,
करता ना इंकार है,
जो भी इससे प्रेम करे ये,
झट उसका हो जाता है,
ना जाने फिर उसके खातिर,
क्या से क्या कर जाता है,
तीन बाण के इस स्वामी की,
जो घर ज्योत जगाता है,
शीश का दानी खाटू वाला,
चमत्कार दिखलाता है,
जिस नैया का श्याम खिवैया,
डूबे ना मजधार है,
संजू सांचे मन से ध्याले,
भव से बेड़ा पार है,
गायक – संजू जी शर्मा।
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