
क्यों वगदे, मेरे अँथरू माँ, तैनूं नज़र ना, आउंदे ने ॥
एह, अपने दिल दा, दर्द तैनूं माँ, सुनाउणा चाहुंदे ने ॥
क्यों वगदे, मेरे अँथरू माँ, तैनूं नज़र ना...
मेरी जिंद, निमाणी उत्ते माँ, पै गया दुखड़ा भारा ।
हत्थां नूं मैं, अड्ड अड्ड के माँ, तैनूं वाज़ां मारां ॥
जो, मेरे सी माँ, अपने ओह हुण, नज़र चुराउंदे ने ॥
कोल मेरे माँ, बैठ ज़रा तूं, तैनूं दिल दी, खोल्ह सुनावां ।
जो लुक्किया, अंदर मेरे माँ, इक इक, दर्द दिखावां ॥
तेरे, हुंदियां वी क्यों, दुखड़े माँ मैनूं, ऐना सताउंदे ने ॥
हत्थीं दे के, खोहण दा माँ, क्यों दस्तूर बनाया ।
ऐना ही जे, रुआउणा सी फिर, क्यों हस्सणा सिखाया ॥
मेरे, हिस्से च माँ, क्यों तेरे, लारे आउंदे ने ॥
दुनियां तां माँ, छड्ड गई मैनूं, तूं वी ना, छड्ड जावीं ।
आपणियां ठोकर, मारी मैनूं, तूं वी ना ठुकरावीं ॥
एहे, नैण तेरे, बच्चड़े दे तैनूं, देखणा चाहुंदे ने ॥
एह दुनियां, बड़ी झूठी ए माँ, आपणा बणा के, लुट लैंदी ।
पहिलां रज्ज के, हसाउंदी ए फिर, करके बेगाना, सुट्ट देंदी ॥
मैं, इकल्ल्ली माइए, रहि गई आं हुण, तेरे चेते आउंदे ने ॥
अपलोडर — अनिलरामूर्ति, भोपाल
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